Love

या फिर लौट कर समंदर से वफ़ा निभाती हैं।

ना जाने क्या सोच कर लहरें साहिल से टकराती हैं;
और फिर समंदर में लौट जाती हैं;
समझ नहीं आता कि किनारों से बेवफाई करती हैं;
या फिर लौट कर समंदर से वफ़ा निभाती हैं।

 

na jaane kya soch kar laharen saahil se takaraatee hain;
aur phir samandar mein laut jaatee hain;
samajh nahin aata ki kinaaron se bevaphaee karatee hain;
ya phir laut kar samandar se vafa nibhaatee hain.

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